Wednesday, January 6, 2016

पार्टी ने भुगता प्रचारक नहीं बनाने का खामियाजा



 भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद और बिहारी बाबू के नाम से मशहूर फिल्म अभिनता शत्रुघ्न सिन्हा ने आज कहा कि बिहार विधानसभा चुनावों में उन्हें प्रचारक नहीं बनाने का खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ा।
श्री सिन्हा ने उनकी जीवनी पर आधारित किताब ‘एनीथिंग बट खामोश’ के विमोचन के अवसर पर उन्हें प्रचारक नहीं बनाये जाने का दर्द बयां किया। उन्होंने कहा कि वह देश के पहले स्टार प्रचारक थे लेकिन पार्टी ने उन्हें बिहार विधानसभा में प्रचारक नहीं बनाया और उसका खामियाजा भुगता। हालांकि उन्होंने साथ ही कहा कि वह इसे भुलाकर अब आगे बढ़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “छोड़ो कल की बातें कल की बात पुरानी नये दौर में लिखेंगे मिलकर नयी कहानी।”
इस मौके पर पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, भाजपा के निलंबित सांसद कीर्ति आजाद, कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला और समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता अमर सिंह, श्री सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा, अभिनेत्री बेटी सोनाक्षी सिन्हा और बेटा कुश सिन्हा भी मौजूद थे। पुस्तक के मुताबिक श्री सिन्हा खुद को तीसरी बार राज्यसभा का सदस्य नहीं बनाये जाने पर श्री आडवाणी से खफा थे।
श्री आडवाणी ने कहा कि उस समय पार्टी में ऐसा नियम था कि किसी को भी दो बार से ज्यादा राज्यसभा का सदस्य नहीं बनाया जाना चाहिये। उन्होंने कहा, “श्री सिन्हा बेहद लोकप्रिय थे और वह लोकसभा चुनाव जीतने में सक्षम थे। अगर उस फैसले से उन्हें दुख हुआ है तो मैं इसके लिए माफी मांगता हूं।” इस पर श्री सिन्हा ने कहा कि आज उन्हें श्री आडवाणी के फैसले पर कोई दुख नहीं है क्योंकि इसके कारण ही उन्हें लोकसभा चुनाव लड़ने की हिम्मत मिली।
इस मौके पर श्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उनको और श्री शत्रुघ्न सिन्हा को कोई भाव नहीं दिया। उन्होंने कहा,“शायद जो लोग चुनाव प्रचार संभाल रहे थे उन्हें हमारी जरूरत महसूस नहीं हुई।” उन्होंने कहा कि यह सही है कि भाजपा में किसी को दो बार राज्यसभा सदस्य बनाये जाने के बाद किसी को तीसरी बार ऊपरी सदन में भेजने का नियम नहीं था लेकिन कई लोग ऐसे हैं , जिन्हें कई बार राज्यसभा भेजा गया है।

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