Monday, January 4, 2016

शिवसेना का PM मोदी पर निशाना, कहा- चाय के बदले शहीद हुए सात जवान



नई दिल्ली: पंजाब के पठानकोट में छिहत्तर घंटे से सेना का ऑपरेशन चल रहा है. अभी भी सभी आतंकियों के मारे जाने की पुष्टि नहीं हुई है. इस बीच सरकार की सहयोगी शिवसेना ने सरकार पर बड़ा हमला बोला है . सामना में लेख के जरिये शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मोदी सरकार की विदेश नीति की न सिर्फ आलोचना की है बल्कि हमले को लेकर सरकार के अंधेरे में होने का आरोप लगाया है.
सामना के संपादकीय में लिखा है, ‘सिर्फ 6-7 आतंकियों ने हमारे खिलाफ युद्ध का ऐलान किया है. जिस बड़ी फौज का ढोल हम बजाते रहते हैं उस ढ़ोल को फोड़ने वाला ये मामला है. सीमा ही नहीं देश की आतंरिक सुरक्षा भी धाराशाई हो गई है. यह इस बात का सबूत है. विपत्ति के समय सरकार के विरोध में बोलना ठीक नहीं है. टीका-टिप्पणी नहीं करते हुए सरकारी कार्रवाई का समर्थन करो क्योंकि यह देश की सुरक्षा का मामला है. लेकिन सुरक्षा का मामला होने के बाद भी क्या सरकार गंभीर है? सिर्फ 6-7 आतंकियों ने फौज को चुनौती दी है. सात जवान शहीद हुए हैं, 50 घायल हैं.’
आगे सामना में पीएम और रक्षामंत्री को सलाह देते हुए लिखा है, ‘इस हिसाब से पता चलता है कि सिर्फ 6 सनकी आतंकियों ने हिंदुस्तान की इज्जत तार-तार कर दी. रक्षामंत्री और प्रधानमंत्री वगैरह इससे सबक लें.’
इस ऑपरेशन पर सवाल उठाते हुए लिखा है, ‘गृह सचिव कहते हैं कि कितने आतंकी छिपे हैं कहा नहीं जा सकता. पूरी जानकारी ऑपरेशन खत्म होने के बाद ही देंगे. इस बयान का मतलब ये है कि सरकार की आंखों के सामने अंधेरा फैला हुआ है.’
पाकिस्तान को लेकर सामना में उद्धव ठाकरे ने लिखा है, ‘पाकिस्तान को अगर रिश्ते सुधारने हैं तो हमले की निंदा का ढ़ोंग मत करो. सूत्रधार मसूद अजह को भारत के हवाले करो. इन दिनों सिर्फ ट्विटर पर श्रद्धांजलि समर्पित करने का काम चल रहा है लेकिन जवानों की मौत क्यों और किसके कारण हुई है?’
पीएम मोदी पर भी सवाल उठाते हुए ठाकरे ने कहा है  अब दुनिया की तरफ नहीं बल्कि अपने देश की तरफ ध्यान देने का वक्त है. सामना में लिखा है, ‘मोदी ने दुनिया एक करने की कोशिश शुरू की है. अब समय अपने देश की ओर ध्यान देने का है. आतंकी घुसे तो दुनिया मदद के लिए नहीं दौड़ी. मोदी जब प्रधानमंत्री नहीं थे तब का उनका एक वाक्य याद आता है. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था- बंदूक की गोली की गूंज में वार्ता कैसे हो सकती है? मोदी का उस समय किया गया सवाल उचित था. हमें वही मोदी चाहिए. आज भी बंदूक और तोप की आवाज से देश के कान पक गए हैं.’


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