Thursday, January 21, 2016

PAK यूनिवर्सिटी अटैक: बच्चों को स्कूल भेजने से डरे लोग, मांगी सिक्युरिटी गारंटी





- दिसंबर 2014 में पेशावर के एक स्कूल में आतंकी हमले में 132 बच्चों समेत 145 लोग मारे गए थे।
- लोगों का मानना है कि बाचा खान यूनिवर्सिटी में हुआ हमला, पेशावर के स्कूल में हुए अटैक की ही कड़ी है। 
- इलाके में 2015 में टेरर अटैक में कम हुए। लेकिन लोगों का मानना है कि पाक आर्मी ने भी हमले रोकने की कुछ खास कोशिशें नहीं कीं।
- एक नागरिक नूर मोहम्मद खान के मुताबिक, हम अपने बच्चों के लिए सिक्युरिटी की गारंटी चाहते हैं। महज कंटीले तार की बाड़ लगा देने से सिक्युरिटी नहीं हो जाती। 
- नूर यह भी कहते हैं, "इन हमलों को रोकने के लिए ठोस प्लान बनाना होगा। आर्मी पब्लिक स्कूल में अटैक एक बड़ा मामला था लेकिन हमने उससे कुछ नहीं सीखा।'
- "आर्मी और सिक्युरिटी एजेंसियां कोशिश कर रही हैं लेकिन उनकी असल जिम्मेदारी तो सिटीजंस की सुरक्षा है। वे इसमें फेल ही रही हैं। आखिर कौन है ये पाकिस्तान तालिबान?'
- बाचा खान यूनिवर्सिटी के एक स्टूडेंट ख्याम मशाल के मुताबिक, “मैं बुरी तरह डर गया था। जब मेरा देश ही सुरक्षित नहीं है तो मैं कैसे सेफ महसूस कर सकता हूं?”
- पेशावर के बिजनेसमैन बहरवार खान के मुताबिक, “आर्मी स्कूल में हमले के बाद से हम बुरी तरह डरे हुए थे। बाचा खान यूनिवर्सिटी की घटना मुझे हिला दिया। मैं अपनी बेटी को तो यूनिवर्सिटी नहीं भेजूंगा।”
- सेल्समैन रहीम शाह का भी कहना है, "हमें और सिक्युरिटी की जरूरत है। जब तक बच्चों को सिक्युरिटी नहीं मिल जाती, लोग उन्हें स्कूल-कॉलेज नहीं भेजेंगे।' 
- पेशावर यूनिवर्सिटी के एक स्टूडेंट मंजूर खान के मुताबिक, “हमें टेररिस्ट्स के साथ किसी भी तरह की दया नहीं दिखानी चाहिए। हमें उनसे डरना नहीं बल्कि लड़ना है। उनसे डरकर हम पढ़ना थोड़ी छोड़ देंगे।”

- आतंकी हमले में मारे गए लोगों में यूनिवर्सिटी का 37 साल का कुक फखर-ए-आलम भी शामिल था। जिसने गेस्ट को बचाने के लिए अपनी जान की फिक्र भी नहीं की।
- फखर के पिता शाह हुसैन ने बताया कि वह स्कूल हॉस्टल में कुक था।
- अब्दुल गफ्फार खान की पुण्य तिथि होने की वजह से कैम्पस में मुशायरा का आयोजन किया गया था। करीब 600 गेस्ट आए हुए थे।
- उसने बुधवार की सुबह जल्दी काम पर जाने की बाद कही थी। उसने कहा था कि उनकी देखभाल करना मेरी जिम्मेदारी है।
- जब दशहतगर्तों ने हॉस्टल पर अटैक किया तब उसने कई गेस्ट को एक रूम में ले गया और दरवाजा बंद कर लिया।
- जैसे ही गेट के पास वह पहुंचा आतंकियों ने उसे गोली मारी।
4. ''मंगलवार को पेपर खत्म हुए थे। पेपर चल रहे होते तो बहुत नुकसान होता। क्योंकि 4 से 5 हजार स्टूडेंट्स हॉस्टल में हर वक्त मौजूद होते हैं। मैं घर के लिए निकल रहा था, तभी फायरिंग की आवाज सुनाई दी। वे चार लोग थे। एक दहशतगर्द के पास बंदूक नहीं थी। जब फायरिंग शुरू की तो हम वहां से भाग निकले।'' - हॉस्टल में रहने वाला एमएससी का एक स्टूडेंट
5. ''दहशतगर्दों के निशाने पर हॉस्टल ही था। फायरिंग की आवाज सुनने के बाद मैंने हॉस्‍टल से निकलने की कोशिश की, लेकिन केमेस्‍ट्री के प्रोफेसर हामिद ने मुझे बाहर जाने से रोक दिया। प्रोफेसर ने अपने हाथ में पिस्‍टल पकड़ रखी थी। हमें रोकने के पहले वो फायर कर चुके थे। तभी हमने देखा कि एक गोली आकर उन्‍हें लगी। हमने देखा कि दो आतंकी गोलियां बरसा रहे हैं। मैं अंदर की ओर भागा। इसके बाद किसी तरह पिछली दीवार जंप कर भाग निकला। तब तक वे आतंकियों के सामने डटे रहे।''
- रॉयटर्स के मुताबिक, तहरीक-ए-तालिबान के एक ग्रुप ने ही इस हमले को अंजाम दिया है। इसका कमांडर उमर मंसूर है।- मंसूर दिसंबर 2014 में पेशावर में आर्मी पब्लिक स्कूल पर हमले का मास्टरमाइंड था। इसमें 132 बच्चों की जान गई थी।- वह टीटीपी के सरगना हकीमुल्ला मसूद का करीबी रहा है और पेशावर के पास दर्रा आदम खेल का रहने वाला है।- 37 साल का मंसूर कभी वॉलीबॉल प्लेयर था। उसके दो बेटे और एक बेटी हैं। इसके बाद भी वह बच्चों को टारगेट करता है।- पेशावर हमले के बाद से वह ‘चाइल्ड किलर’ के तौर पर बदनाम है।- मंसूर इतना खतरनाक है कि तालिबान के जो आतंकी फौजियों या बच्चों पर जरा-सा भी रहम दिखाते हैं, वह उन्हें भी मार डालता है। - वह अक्सर अफगानिस्तान-पाकिस्तान बॉर्डर को पार करता है और अफगानिस्तान से हथियार लेकर आता है।

For more update please follow us on facebook,instagram and twitter also  https://www.facebook.com/News-945280092223004/?fref=ts

No comments:

Post a Comment